Pehowa (prithudak) ek tirth-kurukshetra haryana-india

img20181217071204-1767680046.jpgपेहवा एक तीर्थ,

महाराजा पृथु द्वारा बसाया गया प्राचीन स्थान.

पेहवा हरियाणा के कुरक्षेत्र जिले का एक नगर है इस स्थान को पृथुदक के नाम से भी जाना जाता है यह स्थान सरस्वती नदी के तट पर बसा हुआ है तथा कुरुक्षेत्र के 48 कोस परिक्रमा का एक हिस्सा है जिसमें महाभारत का युद्ध हुआ था। कहा जाता है की इस तीर्थ की रचना प्रजापति ब्रह्मा ने पृथ्वी, जल, वायु और आकाश के साथ सृष्टि निर्माण के आरंभ में ही कर दी थी, पर पृथुदक शब्द की उत्पत्ति का सम्बन्ध ( जो आज के समय में पेहवा के नाम से जाना जाता है) महाराजा पृथु से रहा है इस स्थान पर पृथु राजा ने अपने पिता की मृत्यु के पश्चात उनका क्रिया कर्म व श्राद् किया था अर्थात अपने पिता को उदक यानी जल दिया था , पृथुउधक के जोड से यह स्थान तीर्थ पृथुदक कहलाया गया , इस स्थान पर श्री कृष्ण ने सरस्वती तीर्थ पर दीपक जलाया था उस दीपक में युधिष्टर ने महाभारत में असमय मृत्यु को प्राप्त लोगों की आत्मा की मुक्ति के लिए तेल डाला था क्यूंकि महाभारत के युद्ध में लाखों लोग अकाल मृत्यु में समा गए थे । लोगों का मानना है की आज भी यह दीपक पेहवा में जल रहा है और कई लोग आज भी अपने परिजनों की मुक्ति के लिए उस दीपक में तेल डालने आते है.।

मुख्य मंदिर-

(यहां पर मुख्य मंदिर सरस्वती और कार्तिकेय मंदिर और कई अन्य दर्शनीय मंदिर भी है. )

सरस्वती मंदिर:- सरस्वती नदी के तट पर माता सरस्वती का प्रसिद्ध प्राचीन तीर्थ मंदिर है। सरस्वती तीर्थ अत्यंत तीर्थ माना गया है ।

कार्तिकेय मंदिर:- इस स्थान पर कार्तिकेय, शिव भगवान के ज्येष्ठ पुत्र का मंदिर भी है। जो कि पूरे उत्तर भारत का एकमात्र मंदिर है कहा जाता है की जब कार्तिकेय अपने माता पिता की परिक्रमा करने निकले थे तो इस स्थान पर विश्राम के लिए रुके थे .

मुक्ति धाम-

मान्यता है कि जिस प्रकार हरिद्वार में अस्थी विसर्जन, कुरु क्षेत्र में सूर्यग्रहण सनान का महत्व है। उसी प्रकार पेहवा (पृथुदक) पितृ मोक्ष के लिए प्रसिद्ध है इसलिए पेहवा को मुक्तिधाम भी कहा जाता है, माना जाता है कि यहां किया जाने वाला पिंड दान फलीभूत सिद्ध होता है।

img201812170711551540240730.jpg
पांच पाण्डव का गोल घाट

मेला-

पिहोवा सरस्वती तीर्थ (पृथुदक तीर्थ ) पर हर वर्ष चैत्र अमावस्या का मेला लगता है। वैसे तो इस स्थल पर पूरा वर्ष लोग अपने पितरों की आत्मा की शान्ति के निमित पिण्ड दान व स्नान करने आते हैं। लेकिन चैत्र अमावस्या को यहां स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। इसी दिन यहां विशाल मेला लगता है जिसमें देश के कोने-कोने से लाखों यात्री पहुंच कर अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए पिण्डदान व कर्मकांड करते है। img20181217071132-382448153.jpg

img20181217071015608976145.jpg

पेहोवा तक कैसे पहुंचे ?

सड़क माध्यम से:- पेहोवा पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका बस और कार टैक्सी से यात्रा करना सबसे सुविधाजनक है। चंडीगढ़ से इसकी दूरी लगभग 110 किलोमीटर और अम्बाला से 55 किलोमीटर के करीब है वहीँ कुरक्षेत्र से लगभग 30 किलोमीटर की दुरी है। पटियाला-पंजाब से भी सड़क मार्ग के द्वारा पिहोवा पहुंच सकते हैं।

ट्रैन (Train) के माध्यम से:- पेहवा का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कुरक्षेत्र है । जहाँ पर आप भारत के किसी भी राज्य से पहुंच सकते हैं। यहाँ से पेहवा की दूरी लगभग 31 किलोमीटर है.  ( Click here ONLINE TRAIN BOOKING)

PEHOWA HR WAY GUIDE MAP
PEHOWA WAY GUIDE MAP

विश्राम/आवास सुविधा:-

पेहवा में ठहरने के लिए होटल, धर्मशालएं और गुरुदवारा (बस स्टैंड के नजदीक बगल मैं) है। जो कि तीर्थ स्थल के बहुत नजदीक है। जहाँ से सुविधा के अनुसार तीर्थ स्थल का भ्रमण आसानी के साथ किया जा सकता है .

Placeholder Image
शांतिमय

Thanks for watch and read this blog post.

keep in touch with mOv  (myouterviews). click on below link

On website:-  https://myouterviews.wordpress.com

On facebook:- https://www.facebook.com/myouterviews

One thought on “Pehowa (prithudak) ek tirth-kurukshetra haryana-india

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s